इंसान की तरक्की और इंसानियत का पतन
*✍️ सुप्रभात🔅🏞️🌄💐💐🙏🙏*
*☘️इंसान की तरक्की और इंसानियत का पतन☘️*
"तरक्की" ........
इतनी हुई है कि हजारों किलोमीटर दूर
बैठे इंसान को देख और सुन सकते है...
और "पतन" ........
इतना हुआ कि पास बैठे इंसान की
तकलीफ और दर्द दिखाई नही देता है ! ♥️
🔘 इंसान ने विज्ञान और संचार के क्षेत्र में बेमिसाल प्रगति की है। आज मोबाइल, इंटरनेट और वीडियो कॉल के माध्यम से हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति से जुड़ना पल भर का काम है। दुनिया वास्तव में एक "ग्लोबल विलेज" बन चुकी है। 🌿
🔘 तकनीक ने दूर बैठे लोगों को तो पास ला दिया, लेकिन पास बैठे लोगों को एक-दूसरे से दूर कर दिया है। आज लोग एक ही घर या कमरे में बैठकर भी अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। उन्हें अपने बगल में बैठे परिवार के सदस्य या मित्र की उदासी, मानसिक तनाव या दर्द का अहसास तक नहीं होता। 🌿
🔘 हम सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की पोस्ट पर तो दुख जताते हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपनों की तकलीफों को अनदेखा कर देते हैं। 🌿
🔘 केवल वैज्ञानिक या आर्थिक रूप से आगे बढ़ना ही सच्ची तरक्की नहीं है। यदि हम इंसानी मूल्यों, सहानुभूति और अपनों के प्रति जिम्मेदारी को खो रहे हैं, तो यह समाज का नैतिक और मानसिक पतन है। सच्ची प्रगति तब है जब हम तकनीक का लाभ भी उठाएं और अपने मानवीय रिश्तों की गर्माहट को भी बनाए रखें। 🌿
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