कोई जरूरी तो नहीं कि हर बार शरीर की जाँच में खून, कैल्शियम, विटामिन ही घटते हों !

*✍️ सुप्रभात🔅🏞️🌄💐💐🙏🙏* *☘️
व्यक्तित्व की जाँच☘️*

 कोई जरूरी तो नहीं कि हर बार शरीर की जाँच में
 खून, कैल्शियम, विटामिन ही घटते हों !
कभी कभी ................
व्यक्तित्व की भी जांच करवाकर देखनी चाहिए।
 क्या पता दया, करुणा, मानवता, दोस्ती,
 व्यावहारिकता या इंसानियत भी घट रही हो।

 ➡️ जब हम अस्वस्थ महसूस करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर ब्लड टेस्ट करवाते हैं ताकि खून, कैल्शियम या विटामिन की कमी का पता चल सके। हम शरीर की कमियों को लेकर बहुत गंभीर रहते हैं। लेकिन अपने व्यवहार और चरित्र में आ रही कमियों या गिरावट पर कभी ध्यान नहीं देते। ☘️
➡️ जिस तरह शरीर की रिपोर्ट बीमारी बताती है, उसी तरह हमें समय-समय पर आत्म-मंथन करना चाहिए। हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या समय के साथ हमारा गुस्सा बढ़ रहा है? क्या हमारे भीतर दूसरों की मदद करने की इच्छा कम हो रही है? यदि ऐसा है, तो यह हमारे व्यक्तित्व के बीमार होने का संकेत है। ☘️
➡️ आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में इंसान तकनीकी रूप से तो मजबूत हो रहा है, लेकिन उसके भीतर से दया, करुणा, दोस्ती और इंसानियत जैसे जरूरी विटामिन्स तेजी से घट रहे हैं। इन गुणों के घटने से समाज में संवेदनहीनता, अकेलापन और आपसी कड़वाहट बढ़ती है। ☘️
➡️ एक स्वस्थ शरीर के भीतर एक स्वस्थ और संवेदनशील मन का होना भी उतना ही जरूरी है। केवल शारीरिक रूप से फिट होना काफी नहीं है, बल्कि हमारे भीतर मानवता और व्यावहारिक समझ का जीवित रहना भी अनिवार्य है। ☘️

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