व्यक्ति का सुधरना और बिगड़ना

 *✍️ सुप्रभात🔅🏞️🌄💐💐🙏🙏*

                        

   *🔹व्यक्ति का सुधरना और बिगड़ना🔹*

रामायण में दो व्यक्ति थे :

एक विभीषण और एक कैकेयी,

विभीषण रावण के राज में रहता था, 

फिर भी नहीं बिगड़ा। 

कैकेयी राम के राज में रहती थी,

फिर भी नहीं सुधरी। 

तात्पर्य ........ 

सुधरना और बिगड़ना केवल मनुष्य की सोच 

और उसके स्वभाव पर निर्भर करता है। ♥️

🔯मनुष्य का अच्छा या बुरा होना उसके आस-पास के माहौल से ज्यादा उसकी अपनी बुद्धि, सोच और संस्कारों पर निर्भर करता है। हम अक्सर अपने गलत व्यवहार के लिए दूसरों को या माहौल को दोष देते हैं, लेकिन रामायण के ये दो पात्र सिद्ध करते हैं कि दोष परिस्थिति का नहीं, हमारी अपनी मानसिकता का होता है।

🔯विभीषण राक्षसों की नगरी लंका में रहते थे, जहाँ चारों तरफ अधर्म, अत्याचार और अहंकार का माहौल था। उनके भाई रावण का उन पर पूरा प्रभाव हो सकता था।
 इतनी नकारात्मकता के बीच रहकर भी विभीषण ने धर्म का रास्ता नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी 'सोच' को शुद्ध रखा और भगवान राम की भक्ति चुनी। यदि आपके भीतर की अच्छाई मजबूत है, तो बुरा माहौल भी आपको बिगाड़ नहीं सकता।

🔯कैकेयी अयोध्या के पवित्र और आदर्श माहौल में रहती थीं। जहाँ राजा दशरथ जैसे धर्मपरायण पति और श्री राम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम पुत्र थे, जिनका पूरा जीवन ही त्याग और प्रेम से भरा था।
इतने महान और सकारात्मक माहौल में रहने के बावजूद, मंथरा की बातों में आकर कैकेयी का 'स्वभाव' और मति बदल गई। उन्होंने राम के लिए वनवास और भरत के लिए राजपाठ मांगकर पूरे परिवार को संकट में डाल दिया।यदि मन में ईर्ष्या या स्वार्थ आ जाए, तो सबसे पवित्र माहौल भी किसी को गलत रास्ते पर जाने से नहीं रोक सकता।
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