आप आलस से थके हैं या मेहनत से

 *✍️ सुप्रभात🔅🏞️🌄🎨📚💐💐🙏🙏*

 *♠️ आप आलस से थके हैं या मेहनत से ♠️*

 मेहनत की थकान सुकून देती है, और ...
आलस की थकान डिप्रेशन एवं चिंता देती है।
चलने से पैर थकते हैं, .......
और बैठे रहने से पूरा शरीर थकता है।

 1️⃣ मानव मस्तिष्क को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह काम पूरा करने पर खुद को इनाम देता है। जब आप मेहनत करते हैं, तो दिमाग को सिग्नल मिलता है कि "काम पूरा हुआ।" भले ही शरीर टूट रहा हो, मानसिक रूप से आप विजेता महसूस करते हैं।

2️⃣ इसके विपरीत, जब आप आलस में दिन बिताते हैं, तो आपका मन लगातार आपको कोसता है। इसे मनोवैज्ञानिक 'गिल्ट ऑफ इनएक्शन' (काम न करने का पछतावा) कहते हैं। यह गिल्ट धीरे-धीरे आत्म-सम्मान को कम करता है, जिससे डिप्रेशन और "मैं कुछ नहीं कर सकता" वाली चिंता जन्म लेती है।

3️⃣ जब आप चलते हैं या दौड़ते हैं, तो ऊर्जा का उपभोग केवल शरीर के कुछ हिस्सों (जैसे पैरों) द्वारा किया जाता है। यह थकान प्राकृतिक है। यह शरीर के रक्त संचार को बेहतर बनाती है, मांसपेशियों को मजबूत करती है और फेफड़ों को ऑक्सीजन देती है। यह थकान आपको कमजोर नहीं, बल्कि अंदर से अधिक मजबूत और फुर्तीला बनाती है।

4️⃣ विज्ञान का नियम है कि जो चीज रुकी हुई है, उसमें जंग लगने लगता है। जब आप लंबे समय तक एक ही जगह बैठे या लेटे रहते हैं, तो शरीर का ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। मांसपेशियों में अकड़न आने लगती है और ऊर्जा का स्तर बिल्कुल गिर जाता है। बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी, गर्दन और पीठ सब दर्द करने लगते हैं। यानी बिना कोई वजन उठाए ही आपका पूरा शरीर टूट जाता है।

 5️⃣ डिप्रेशन का सबसे बड़ा इलाज है 'एक्शन' यानी कुछ न कुछ करना। जब आप चलते हैं (कर्म करते हैं), तो केवल पैर थकते हैं, लेकिन आपके न्यूरॉन्स सक्रिय हो जाते हैं। जब आप बैठे रहते हैं, तो मन में नकारात्मक विचारों की बाढ़ आ जाती है। बैठे रहने से पूरा शरीर और मन इसलिए थकता है क्योंकि गतिहीनता मानसिक ऊर्जा को सोख लेती है। ऊर्जा केवल काम करने से पैदा होती है, बैठकर बचाने से नहीं।

 6️⃣ जब आप किसी मेहनत वाले काम में डूब जाते हैं, तो आप समय और दर्द भूल जाते हैं। इस दौरान दिमाग में हैप्पी हार्मोन रिलीज होते हैं, जो शरीर की थकान के बावजूद मन को 'परम सुकून' देते हैं। आलस की स्थिति में दिमाग में कोई डोपामाइन रिलीज नहीं होता। दिमाग बोरियत महसूस करता है। बोरियत को हमारा दिमाग एक 'खतरे' की तरह देखता है। यही कारण है कि बिना कुछ किए भी आप शाम को भारी और थका हुआ महसूस करते हैं।

 7️⃣ जो लोग मेहनत करते हैं, उनका अपनी परिस्थितियों पर नियंत्रण महसूस होता है। उन्हें लगता है कि वे अपनी तकदीर खुद लिख रहे हैं। पैरों की थकान इस बात का सबूत है कि वे आगे बढ़ रहे हैं। जबकि बैठे रहने वाले लोग धीरे-धीरे यह मानने लगते हैं कि परिस्थितियां उन पर हावी हैं। यह लाचारी उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेलती है। पूरा शरीर इसलिए थक जाता है क्योंकि मन ने हार मान ली होती है।

 8️⃣ थकान हमारी दुश्मन नहीं है, बल्कि गलत तरह की थकान हमारी दुश्मन है। विचार कीजिए कि आप मंज़िल की ओर बढ़ते हुए गर्व से थकना चाहते हैं, या एक ही जगह बैठकर पछतावे से थकना चाहते हैं।

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